Core Of The Heart

भूल के काली शब को , लिखो एक नया कुर्शिदा | गुम न होने पाए आवाज तेरी , बरसों तक सुनाई देती रहे सदा ||

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खिलौना

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कभी थपकियाँ देकर सुलाती है,
तो कभी प्यार से सहलाकर जगाती है ।
कभी ममतामयी स्वहस्तों से खिलाती है,
तो कभी एक पुचकार से सारे दुःख-दर्द भगाती है ॥

कभी पीछे से आकर,
कर लेती है आलिंगन ।
तो कभी सामने से आकर,
ले लेती है चुम्बन ॥

मैं चाहे कितना भी बड़ा हो जाऊं,
उसके समक्ष सदा बौना ही रहूँगा ।
सारी दुनिया भले ही मुझे इंसान समझे,
अपनी माँ के लिए मैं एक खिलौना ही रहूँगा ॥

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