Core Of The Heart

भूल के काली शब को , लिखो एक नया कुर्शिदा | गुम न होने पाए आवाज तेरी , बरसों तक सुनाई देती रहे सदा ||

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अब गलतियां भी संभलकर करो !

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दूसरों की मज़बूरियों से,
अपना उल्लू सीधा करने की ताक में रहते हैं ।
कोई गलती भी करना तो, संभल के करना दोस्तों,
कुछ लोग फायदा उठाने की फ़िराक में रहते हैं ॥

मीठी – मीठी बातें कहते हैं ,
धीरे – धीरे जाल में फंसाते हैं ।
गलतियों से डरने वालों को,
झूठी सांत्वनाएं देकर हंसाते हैं ॥

एक बार बहल जाने पर,
बरबाद किये बिना नहीं छोड़ते हैं ।
सागर में बहुत दूर ले जाकर,
मझधार में मुख मोड़ते हैं ॥

आदमी पछताता, ठगा हुआ सा,
अपना सा मुँह लेकर रह जाता है ।
उसके साथ क्या बीती,
किसी से कुछ न कह पाता है ॥

गलतियां करो तो स्वीकार करो,
फल से डरकर मत भागो ।
गलतियां नहीं छुपाओ, नहीं किसी से कहो छुपाने को,
अपितु सबको सच बताओ और माफ़ी माँगो ॥

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mithilesh dhar dubey के द्वारा
March 25, 2014

गहरे भाव समेटे लाजवाब रचना। बधाई।

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    March 27, 2014

    बहुत-बहुत धन्यवाद आपका आदरणीय दुबे जी । आपके स्नेह के लिए आभारी हूँ ।


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