Core Of The Heart

भूल के काली शब को , लिखो एक नया कुर्शिदा | गुम न होने पाए आवाज तेरी , बरसों तक सुनाई देती रहे सदा ||

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नज़रें

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कभी किसी को सत्कर्मों का ,
मान दिलाती हैं ।
तो कभी किसी को ,
पापकर्मों का एहसास कराती हैं ।।

कभी किसी को संबल देकर ,
निर्भय बनाती हैं ।
तो कभी किसी को ,
बहुत डराती हैं ।।

कभी मद में चूर , किसी से मिले बिना,
सातवें आसमान पर जाती हैं ।
तो कभी लज्जा में, किसी से मिलकर,
जमीन में गड़ जाती हैं ।

कभी अगर लड़ती हैं किसी से
तो दो से चार हो जाती हैं |
तो कभी किसी से, दुश्मनी में चुभकर,
मिलना ही दुश्वार हो जाती हैं |

अगर अच्छी हों तो,
सब अच्छा दिखलाती हैं ।
अगर बुरी हों तो,
लग जाती हैं ।

कभी किसी के मन की पवित्रता को,
बाहर झलकाती हैं |
तो कभी किसी के मन की संकीर्णता को ,
बाहर लाती हैं |

*************************************************************************************

ऐ ईश्वर, मुझे ऐसी नज़र, नज़र कर,
जो कभी भी किसी मासूम की गुनाहगार न हो सकें ||
जब चाहूं दौड़ाऊँ, उन्हें दुनिया भर में,
और किसी को इससे इनकार न हो सके ||

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
March 30, 2013

बहुत – बहुत धन्यवाद , आदरणीय प्रदीप जी ।

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
March 26, 2013

आमीन सादर बधाई प्रस्तुति हेतु. होली मुबारक आदरणीय

akraktale के द्वारा
March 24, 2013

आदरणीय विवेक जी सादर, नज़रों पर नजर करती सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकारें.

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    March 24, 2013

    नमस्ते अशोक जी ,बहुत – बहुत धन्यवाद ।

harirawat के द्वारा
March 16, 2013

विवेक कुमार जी सच्मुच्ये नजर बला ही ऐसी है, हर दिल में उसके दिमाग को पढ़कर उतर जाती है और वैसे ही उसे शीशा दिखाती है. सुन्दर प्रस्तुति !

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    March 24, 2013

    बहुत – बहुत धन्यवाद , आदरणीय हरि जी ।

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
March 16, 2013

बहुत – बहुत धन्यवाद शालिनी जी ।

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    March 16, 2013

    आपका बहुत – बहुत धन्यवाद भगवान बाबू ।


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