Core Of The Heart

भूल के काली शब को , लिखो एक नया कुर्शिदा | गुम न होने पाए आवाज तेरी , बरसों तक सुनाई देती रहे सदा ||

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अभी बहुत कुछ बाकी है !

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(अगर कोई सच्चे मन, कठिन परिश्रम तथा सच्ची लगन से कार्य करता है तो ही इस कविता का कोई मतलब है नहीं तो ये कोरी बकवास के सिवा और कुछ नहीं है |)

ईश्वर का कोई फैसला,
कभी सही न लगे जीवन में |
तो उसे कोसने में समय मत लगाना क्योंकि
अभी तो उसकी बहुत सी करामातें बाकी है ||

तेरी कोई मांग अभी,
पूरी न हुई तो दुखी म़त होना |
अभी तो ईश्वर की बहुत सी ,
सौगातें बाकी हैं ||

अगर ज्येष्ठ, वैसाख में ,
तेरी प्यास न बुझी तो हैरान मत होना,
अभी तो सावन – भादो की बहुत सी ,
रिमझिम बरसातें बाकी है ||

कभी जीवन के खेल में ,
कोई बाज़ी हार गए तो आंसू मत बहाना |
क्युकी अभी तो जीवन में ,
और भी बिसातें बाकी हैं ||

कभी राहों में , कोई बिछड़ गया तुझसे,
तो खुद को कभी अकेला मत समझना |
अभी तो जिंदगी में बहुतों से,
बहुत सी मुलाकातें बाकी हैं ||

कभी किसी परीक्षा में,
अनुत्तीर्ण हो गए तो मुंह मत लटकाना |
अभी तो तेरे जीवन में ,
बहुत सी ज़मातें बाकी हैं |

जीवन के पन्ने यदि कोरे हैं,
तो खुद को कभी बेकार मत समझना |
अभी से ही उन्हें भरना शुरू कर दो,
क्योंकि तेरे बक्से में अभी बहुत सी कलमें और दवातें बाकी हैं |

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
February 23, 2013

विवेक जी, निराशा में भी आशा का सन्देश देने बाली सकारात्मक एवं सार्थक सोच हेतु प्रेरित करने बाली रचना हेतु हार्दिक वधाई…

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    March 24, 2013

    बहुत – बहुत धन्यवाद , आदरणीया सुषमा जी ।

akraktale के द्वारा
December 29, 2012

विवेक जी सादर, बहुत सुन्दर रचना. बहुत खुशी है गर कुछ पन्ने कोरे हैं पिछला अनुभव लेना और उनको ऐसा सजाना कि जब भी कोई पुराना पन्ना खुल जाए मन उदास ना हो. बधाई स्वीकारें.

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    January 3, 2013

    आदरणीय अशोक जी, प्रतिक्रिया के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद ।

jlsingh के द्वारा
December 27, 2012

प्रिय विवेक जी, सादर! बहुत ही सकारात्मक सोच के साथ लिखी गयी रचना! पर इसे इतिश्री मत समझना क्योंकि अभी भी बहुत सी यादे बाकी है!

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    January 3, 2013

    बहुत-बहुत धन्यवाद , आदरणीय जवाहर जी।

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 27, 2012

बात अभी बाक़ी है रात अभी बाकी है सुन्दर भाव युक्त रचना की तारीफ अभी बाक़ी है बहुत सुन्दर रचना. वास्तव में आनंद आया. बधाई. विवेक जी, सादर

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    December 27, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी , सादर नमस्कार | आपको आनंद आया , इससे बढ़कर ख़ुशी की बात और नहीं हो सकती | बहुत – बहुत धन्यवाद |

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
December 26, 2012

उत्प्रेरक व उत्तम प्रस्तुति के लिए विवेक जी ! हार्दिक बधाई !

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    December 27, 2012

    आदरणीय आचार्य जी , सादर नमस्कार | बहुत – बहुत धन्यवाद आपका |


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