Core Of The Heart

भूल के काली शब को , लिखो एक नया कुर्शिदा | गुम न होने पाए आवाज तेरी , बरसों तक सुनाई देती रहे सदा ||

24 Posts

145 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 10014 postid : 35

ईश्वर की व्यापकता और मेरी सोंच -2

  • SocialTwist Tell-a-Friend

जो पलायित हैं ,
जीविकोपार्जन को बाहर जाते हैं |
अपने लोग -अपनी माटी को ,
सदा देखने को ललचाते हैं |
ऐसे व्यस्त लोगों के परिजनों के साथ,
तू फ़ुरसत के कुछ पल तो नहीं ?

जो अकाल-ग्रसित हैं ,
जिन्हें दो जून की रोटी भी नसीब नहीं है ।
प्यास रह-रह के सताती है उन्हें ,
और एक चुल्लू पानी तक करीब नहीं है ।
ऐसे क्षुधा-त्रस्त लोगों को प्राप्त,
तू कहीं अन्न -जल तो नहीं ?

जो निःसंतान हैं,
जिन्हें बुढापे में सहारे की चिंता सताती है ।
जिनका अपना कोई वारिस नहीं है,
और दुनिया जिन्हें बाँझ बताती है ।
ऐसे दुखी जनों के गोद में ,
तू शिशु चंचल तो नहीं ?

जो दुर्जन थे ,
बुरे कर्म किया करते थे ।
पर अब किये का पछतावा है उन्हें ,
जो इंसानों के रक्त से अपना घर भरते थे ।
ऐसे प्रायश्चितरत लोगों के ,
तू नेत्र सजल तो नहीं ?

जो तपस्वी हैं,
नित तप में लीन रहते हैं ।
नाम लेते हैं अनगिनत तेरे ,
और इस क्रिया को जप कहते हैं ।
ऐसे सन्यासी तेरे खोजियों को क्या पता ,
तू सबके शरीर का हलचल तो नहीं ?

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.50 out of 5)
Loading ... Loading ...

3 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Sushma Gupta के द्वारा
December 22, 2012

प्रिय विवेक जी,आपकी ईश्वर के प्रति सोच सर्व्यापक एवं सार्भोम है, आपके इन मनो भावों को एस सुन्दर रचना में सहज देखा जा सकता है…नव -बर्ष की शुभकामनाओं सहित मेरे ब्लॉग पर गीता जयंती के उपलक्ष्य में पढ़ें ..

yogi sarswat के द्वारा
December 6, 2012

जिनका अपना कोई वारिस नहीं है, और दुनिया जिन्हें बाँझ बताती है । ऐसे दुखी जनों के गोद में , तू शिशु चंचल तो नहीं ? जो दुर्जन थे , बुरे कर्म किया करते थे । पर अब किये का पछतावा है उन्हें , जो इंसानों के रक्त से अपना घर भरते थे । सुन्दर और सार्थक शब्द विवेक जी !

akraktale के द्वारा
December 5, 2012

विवेक जी सादर, सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकारें.


topic of the week



latest from jagran