Core Of The Heart

भूल के काली शब को , लिखो एक नया कुर्शिदा | गुम न होने पाए आवाज तेरी , बरसों तक सुनाई देती रहे सदा ||

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कुछ पंक्तियाँ

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हमारे साथ कठिनाइयाँ ,
रहती हैं उम्र भर |
कभी किसी को पाने की है लालसा,
तो कभी किसी को खोने का है डर ||

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क्या निर्बल , क्या ताकतवर ,
क्या मनुष्य क्या जानवर |
हैं छुपे सबके ही भीतर ,
पता नहीं कैसे – कैसे डर ||

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धैर्य के साथ परिश्रम करो मित्रों,
सफलता ललक रही है , तेरी होने के लिए |
एक बार करवट तो लेने दो जिंदगी को ,
फिर आराम से सोने के लिए ||

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
December 22, 2012

धैर्य के साथ परिश्रम करो मित्रों, सफलता ललक रही है , तेरी होने के लिए | एक बार करवट तो लेने दो जिंदगी को , फिर आराम से सोने के लिए || बहुत खूब प्रेरणादायक बधाई सादर

VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
September 23, 2012

बहुत – बहुत धन्यवाद आपका राजीव जी |

Rajeev Varshney के द्वारा
September 16, 2012

भाई विवेक जी कठिनैयाँ और संघर्ष तो जीवन का दूसरा नाम है, इनसे कैसा डरना. जीवन की वास्तविकता से परिचय कराती कविता. सुंदर प्रस्तुति. बधाई, राजीव वार्ष्णेय

अजय यादव के द्वारा
September 3, 2012

vivek ji ,abhivadan , antim 4 panktiya bahut laajwab hain ,plz mere blog pr bhi aayiye|

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    September 16, 2012

    बहुत – बहुत्धान्यवाद एवं अभिवादन, अजय जी |

akraktale के द्वारा
August 30, 2012

हमारे साथ कठिनाइयाँ , रहती हैं उम्र भर | कभी किसी को पाने की है लालसा, तो कभी किसी को खोने का है डर ||  विवेक जी सुन्दर रचना. बधाई.

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    August 31, 2012

    बहुत-बहुत धन्यवाद आदरणीय अशोक जी |

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
August 30, 2012

धैर्य के साथ परिश्रम करो मित्रों, सफलता ललक रही है , तेरी होने के लिए | एक बार करवट तो लेने दो जिंदगी को , फिर आराम से सोने के लिए || बहुत ही सुन्दर भाव, सन्देश. बधाई. लिंक देते रहें.

    akraktale के द्वारा
    August 30, 2012

    बहुत सुन्दर. बधाई.

    VIVEK KUMAR SINGH के द्वारा
    August 31, 2012

    आदरणीय कुशवाहा जी, सादर नमस्कार | बहुत – बहुत धन्यवाद आपका |


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